माँ
A Poem to describe gratitude towards mother
5/8/20241 min read
तेरी सीप का मोती हूँ मैं
तेरे दीप की ज्योति हूँ मैं
तेरी लहरों की उमंग मैं
तेरे साज़ की तरंग मैं
तेरे चेहरे का नूर मैं
तेरा अपना गुरूर मैं
तेरी बातों के जादू मे मैं
तेरे खाने की खुशबू में मैं
तेरी आंख का तारा हूँ मैं
तेरा राज दुलारा हूँ मैं
मेरी ताकत भी तू
मेरी जन्नत भी तू
ख़ुदा की बक्शी नेमत भी तू
तुझसे अलग नहीं मैं , न तू मुझसे ज़ुदा है
तुझसे ही है मेरी हस्ती, माँ तु ही मेरा ख़ुदा है