मैं ख़ामोश साहिल सा, तू लहरों सी चंचल है
मैं ठहरा हुआ पानी, तू रिमझिम बरसता बादल है
मैं हूँ धूप दुपहरी की, तू शाम का ठंडा आंचल है
मैं तिनका एक अदद सा, तू एक घना सा जंगल है
मैं पेड़ पुराना नीम का, तू रोज़ महकता संदल है
मैं कागज़ के फूल सा, तू सुंदर नीलकमल है
सुनसान गली का राही मैं, तू भीड़ के जैसी हलचल है
मैं कैद पुरानी यादों में, तू आने वाला पल है
तीरे-ए-नज़र का घायल मैं, पता जो पूछे कहता हूँ
तेरी आँखों का काजल हूँ, तेरी आँखों मे रहता हूँ
जब भी देखता हूँ तस्वीर तेरी
अजीब सा सुकून मिलता है.
जागते हैं अजनबी एहसास
ज़िन्दगी को जुनून मिलता है..
चमक उठती है आंखे तेरे नूर से
दूर हो जाते है मन के अंधेरे
कट जाती है रात बिरह की
हो जाते है सुंदर सवेरे……
एक आहट सी होती है दिल पर
मुस्कुराकर..धीरे से कहती है …
‘दिल का दरवाजा खोलिए हुज़ूर
आपका मेहमान.. आ गया है’
इतनी न मेरी नज़्म की तारीफ़ किया कर
तुझको भी मैं अपनी कोई नज़्म बना लूँ
इतनी न दे मुझे, ज़मीं तेरे दिल की
तेरे दिल मे छोटा सा , कहीं घर मैं बना लूँ
तकाज़ा है वक़्त का,मैं रहूँ दूर तूझसे
पास आके कहीं चेहरा, मेरा मैं ना छुपा लूँ
तेरी हंसी को दूर से देखूँ मैं बेसबब
अपनी खुशी को अपने दिल में मैं दबा लूँ
ये इल्म है मुझे, हम मिल नही सकते
गुज़री हुई यादों से कोई ख्वाब सजा लूँ