काजल

मैं ख़ामोश साहिल सा, तू लहरों सी चंचल है

मैं ठहरा हुआ पानी, तू रिमझिम बरसता बादल है

मैं हूँ धूप दुपहरी की, तू शाम का ठंडा आंचल है

मैं तिनका एक अदद सा, तू एक घना सा जंगल है

मैं पेड़ पुराना नीम का, तू रोज़ महकता संदल है

मैं कागज़ के फूल सा, तू सुंदर नीलकमल है

सुनसान गली का राही मैं, तू भीड़ के जैसी हलचल है

मैं कैद पुरानी यादों में, तू आने वाला पल है

तीरे-ए-नज़र का घायल मैं, पता जो पूछे कहता हूँ

तेरी आँखों का काजल हूँ, तेरी आँखों मे रहता हूँ

woman with blue eyes covering her face with blue textile
woman with blue eyes covering her face with blue textile

मेरा ख़्वाब

जब भी देखता हूँ तस्वीर तेरी
अजीब सा सुकून मिलता है.
जागते हैं अजनबी एहसास
ज़िन्दगी को जुनून मिलता है..

चमक उठती है आंखे तेरे नूर से
दूर हो जाते है मन के अंधेरे
कट जाती है रात बिरह की
हो जाते है सुंदर सवेरे……

एक आहट सी होती है दिल पर
मुस्कुराकर..धीरे से कहती है
दिल का दरवाजा खोलिए हुज़ूर
आपका मेहमान.. गया है

तस्वीर

black and silver fountain pen
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gold diamond studded ring on white textile
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इतनी मेरी नज़्म की तारीफ़ किया कर

तुझको भी मैं अपनी कोई नज़्म बना लूँ

इतनी दे मुझे, ज़मीं तेरे दिल की

तेरे दिल मे छोटा सा , कहीं घर मैं बना लूँ


तकाज़ा है वक़्त का,मैं रहूँ दूर तूझसे

पास आके कहीं चेहरा, मेरा मैं ना छुपा लूँ

तेरी हंसी को दूर से देखूँ मैं बेसबब

अपनी खुशी को अपने दिल में मैं दबा लूँ

ये इल्म है मुझे, हम मिल नही सकते

गुज़री हुई यादों से कोई ख्वाब सजा लूँ

तेरी कमी

कुछ बेअसर सी है नज़्में मेरी आजकल

वो दात की ठंडक है लापता
पढ़कर चमकने वाली आंखों की कमी है

खामोश है ज़ुबान,इरशाद जो कहती थी

वाह ! क्या खूब ! सी तारीफों की कमी है

दिल के सुकून वाली सुबह है गायब
मन को सहलाती रातों की कमी है

लिखते लिखते रुक जाती है कलम
कुछ मचलते ज़ज़्बातों की कमी है

बढ़ रही है तल्खियाँ रिश्तों में बेवजह

ठंडक भरी हुई बरसातों की कमी है

जाएंगी बहारें उसके आने भर से
चंद मुलाक़ातों की कमी है

खिल उठेगी फिर से नज़्म मेरी ऐ दोस्त

बसकुछ प्यार भरी बातों की कमी है

man sitting on brown dock in front of gray rock formation
man sitting on brown dock in front of gray rock formation

आसमाँ

आज धुंधला सा है आसमाँ, हवाओं में नमी सी है
वक़्त रुक सा गया है, धड़कनो की कमी सी है
रूह हैरान, होश गायब, सांस कुछ थमी सी है

क्यों बढ़ गई भला हलचल ख़यालों की
लगता है उसकी यादों ने दिल पे दस्तक दी है

मेरे ज़ज़्बात मुझे हैरान करते हैं

क्यूँ इस कदर परेशान करते हैं

कभी खींचते है तेरी ओर बेवजह

खुद से ही मुझे अनजान करते हैं

जुदा जुदा राहें अपनी,अलग है अब कायनात हमारी

ख्वाब में भी मुमकिन नही,शायद मुलाक़ात हमारी

क्यों दिल को देते हैं ,एक झूठी सी आस

फ़िर क्यों तुझे मुझपे यूँ मेहरबान करते हैं


पुराने संदूकों में क़ैद है अफ़साने अपने

वक़्त ने उनपे थोड़ी धूल भी जमा दी है

दे नही सकता तुझे,उन यादों का तोहफा

क्यों ये फिर, ज़िंदा वही दास्तान करते हैं

पाना ही नही होता प्यार का मुकद्दर

दुआओं में जिंदा रहूँ, इतना ही बहुत है

गर तुम मेरे अपने हो ‘ज़ज़्बात परिंदो’

उड़ जाओ के अब वो सनम ‘ख्वाब’ हो गया…

ज़ज़्बात

orange and blue sky during golden hour
orange and blue sky during golden hour
silhouette of man standing near body of water
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