बचपन

कितना कुछ चाहे ये दिल

वक्त में पीछे जाना मुश्किल

बचपन बीता जिन गलियों में

अब एक झलक भी पाना मुश्किल

नहरें, बेर और आम का मौसम

बरिश की वो रिमझिम रिमझिम

पंखा कूलर सुपरहिट थे

अब एसी बिना चलाना मुश्किल

गली क्रिकेट और गिल्ली डंडा

मटके का पानी ठंडा ठंडा

मिट्टी में खेले, बारिश में भीगे

अब वो जश्न मनाना मुश्किल

दिन भर मस्ती, पढ़ने में सुस्ती

मम्मी को पप्पी, पापा से कुश्ती

बिस्किट, रसना, चुस्की सब थे

अब स्वाद वो वपस लाना मुश्किल

फिर आगे बड़ी जिंदगी ऐसे

बाँध से पानी छूटा जैसे

पढ़े लिखे और लगे कमाने

बचपन के वो गए ज़माने

माँ

नन्ही परी

A baby's hand resting on a patterned blanket.
A baby's hand resting on a patterned blanket.

एक नन्ही परी सी दुनिया मे आयी
खुशियां दो जहानों की साथ लाई


नन्हे पैर जब रखे ज़मीन पर
तुझे चलता देख माँ फूली न समाई


मीठी सी मुस्कान जब बिखेरी घर में
अंधेरों में कोई रोशनी टिमटिमाई

पापा के कंधे पर रख के सर, जो सोई
नींदों ने सपनों की माला पिरोई


चॉकलेट,आइसक्रीम के लिए रोना
वो तेरा बार्बी का प्यारा खिलौना


दादा दादी को पोएम सुनाना
‘मैया यशोदा’ पे नाचकर दिखाना

तेरी ज़िद, मुस्कान, नादानी, शैतानी
सब पसंद है मुझे, मेरी गुड़िया रानी

मेरी ताक़त,दौलत,मेरा ग़ुरूर है तू
दिल का सुकून,आंखों का नूर है तू

तेरी सीप का मोती हूँ मैं

तेरे दीप की ज्योति हूँ मैं


तेरी लहरों की उमंग मैं

तेरे साज़ की तरंग मैं

तेरे चेहरे का नूर मैं

तेरा अपना गुरूर मैं

तेरी बातों के जादू मे मैं‌

तेरे खाने की खुशबू में मैं

तेरी आंख का तारा हूँ मैं

तेरा राज दुलारा हूँ मैं

मेरी ताकत भी तू

मेरी जन्नत भी तू

ख़ुदा की बक्शी नेमत भी तू

तुझसे अलग नहीं मैं , न तू मुझसे ज़ुदा है

तुझसे ही मेरी हस्ती, माँ तु ही मेरा ख़ुदा है

ज़िन्दगी

धीमी करो ज़िन्दगी की रफ्तार
के जी भर के जी सको…

बाँटो ढेर सारा प्यार
के जी भर के जी सको…

जो छूट गया उसे जाने दो
एक नई सुबह को आने दो
करो सपनो को साकार
के जी भर के जी सको….

फुरसत के कुछ पल तलाशो
मुश्क़िलों का हल तलाशो
आगे बढ़ो, करो मन्ज़िलों को पार
के जी भर के जी सको….

बचपन से कोई शरारत चुराओ
पानी मे कागज़ की कश्ती चलाओ
मनाओ दोस्ती का त्योहार
के जी भर के जी सको…

सपनो के पंख फड़फडाओ
मन के परिंदो को उड़ाओ

एक ही मिली है जिंदगी
ज़रा खुल के मुस्कुराओ

सजाओ दिल का दरबार
के जी भर के जी सको….

photo of silhouette photo of man standing on rock
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राधा

हर कृष्ण को राधा चाहिए
तपते मन को शीतल कर दे
ऐसी निर्मल जलधारा चाहिए
हर कृष्ण को राधा चाहिए

अभिव्यक्ति कोई आधार नहीं
प्रेम कोई व्यापार नहीं
जग को यही सिखाने को
बंसी मधुर सुनाने को
हर कृष्ण को राधा चाहिए

पत्थर सी इस दुनिया में
प्रेम बीज उपजाने को
दर्द विरह का सहकर भी
अपना धर्म निभाने को
आदर्श नया दिखाने को
हर कृष्ण को राधा चाहिए

-विजय

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